What is Right To Recall ? राईट टू रिकॉल क्या है ? प्रजा अधीन रजा किसको कहते है ?

What is Right To Recall ?

What is Right To Recall ?  राईट टू रिकॉल क्या है ?  प्रजा अधीन रजा  किसको कहते है ?

Right to Recall का सामान्य अर्थ है  :  वोट  वापिस  लेने  का  अधिकार  होना  !!  किन्तु यह इससे कहीं अधिक है

भारतीय लोकतंत्र में, एक सांसद या एक विधायक का कार्यकाल 5 वर्ष (सदन का कार्यकाल) होता है।अगर वे अपनेचुने हुए प्रतिनिधि से नाखुश हैं, तो मतदाताओं के लिए कोई सहारा नहीं है। क्या होगा अगर उनके पास कार्यकाल समाप्त होने से पहले विधायकों को वापस बुलाने का अधिकार है?अपने प्रतिनिधि को समय से पहले निकाल दे |
                                    

राईट टू रिकॉल  (Right To Recall) के तहत  मतदाता अपने सामान्य कार्यकाल की समाप्ति से पहले निर्वाचित अधिकारियों को हटाने की शक्ति रखता है।  इस प्रकार, याद रखें कि मतदाताओं को विधायिका से उनके प्रतिनिधियोंको वास्तव में 'डी-इलेक्ट' करने की शक्ति प्राप्त होती है, जब मतदाता की न्यूनतम संख्या एक मतदाता के रूप में शुरू होती है, जो मतदाता की भूमिका में पंजीकृत होते हैं।
       

  Right to Recall से आशय ऐसी प्रक्रियाओ से है जिनका प्रयोग करके आम नागरिक शासक वर्ग को नियंत्रित करते है। उदाहरण के लिए, मान लीजिये, किसी जिले में पुलिस ठीक से काम नही कर रही और इस वजह से अपराध बढ़ते जा रहे है। अब यदि अमुक जिले के नागरिको के पास यह प्रक्रिया हो कि वे अपने बहुमत का प्रदर्शन करके पुलिस प्रमुख को किसी दुसरे पुलिस प्रमुख से बदल सके, तो यह कहा जाएगा कि जिले के नागरिको के पास पुलिस प्रमुख को रिकॉल करने का अधिकार है। और इसी तरह की प्रक्रियाएं जिला स्तर पर शिक्षा अधिकारी, चिकित्सा अधिकारी आदि पर तथा राज्य व केंद्र स्तर पर विधायक, मुख्यमंत्री, सांसद, प्रधानमंत्री, हाई कोर्ट जज, सुप्रीम कोर्ट जज, सीबीआई निदेशक आदि पर भी हो सकती है। 

       

1) यह भारत में अब तक लागू क्यों नहीं हुआ है ?

इसकी कई सारी वजहें है जिनमे दो वजहें मुख्य है 
 
जानकारी का अभाव 
ड्राफ्ट का अभाव
राईट टू रिकॉल  (Right To Recall)  ऐसा क़ानून है कि इसे किसी भी देश में बड़े आदमियों का कभी समर्थन नहीं मिलता। बड़े आदमी यानी अति धनिक वर्ग और उन पर आश्रित व्यक्ति। इन कानूनों की मांग छोटे छोटे एक्टिविस्ट और नागरिक आगे बढ़ाते है। जब कई वर्षो में जाकर इनकी मांग खड़ी हो पाती है, तो धनिक वर्ग किसी न किसी तरीके से मांग को रफा दफा कर देते है। फिर से छोटे छोटे लोग इन्हें आगे बढाते है, और बड़े लोग फिर किसी न किसी पैंतरे से इसे किनारे कर देते है।
बस यह इसी तरीके का एक रोटेशन है। दुनिया के कई देशो में इस तरह का रोटेशन पिछले 150 सालों से चल रहा है। प्रत्येक देश के एक्टिविस्ट चाहते है कि उनके देश में राईट टू रिकॉल क़ानून लागू हो जाए। लेकिन अब तक सिर्फ अमेरिका के एक्टिविस्ट ही इन्हें अपने देश में लागू करवाने में सफल हो पाए है। शेष सभी देशो में अब तक यह बाजी धनिक वर्ग के पाले में ही रही है। जूरी सिस्टम और वेल्थ टेक्स का भी यही हिसाब है।


(10) भारत में राईट टू रिकॉल कानून आने से देश में क्या परिवर्तन आएगा ?
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मेरे विचार में पीएम पर रिकॉल लाये बिना हम प्रधानमंत्री को जूरी सिस्टम, वेल्थ टेक्स, एमआरसीएम, वोइक, राईट टू रिकॉल पुलिस प्रमुख, राईट टू रिकॉल शिक्षा अधिकारी आदि क़ानून गेजेट में छापने के लिए बाध्य नहीं कर सकते। और बिना इन कानूनों के भारत की सेना को आत्मनिर्भर नहीं बनाया जा सकता।
और यदि हम सेना को आत्मनिर्भर बनाने में असफल हो जाते है तो यह तय है कि बहुराष्ट्रीय कम्पनियां भारत के सभी प्राकृतिक संसाधनों एवं राष्ट्रिय सम्पत्तियों का अधिग्रहण करके भारत को आर्थिक-सामरिक-धार्मिक रूप से गुलाम बना देगी !! राईट टू रिकॉल, जूरी सिस्टम, वेल्थ टेक्स लाये बिना इसे किसी भी तरह रोका नहीं जा सकता !!!
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यह लोकसभा सांसद Varun Gandhi द्वारा प्रस्तावित एक निजी विधेयक था। इस संशोधन विधेयक में 'राईट टू रिकॉल  (Right To Recall)' को लागू करने का प्रस्ताव है जिसके द्वारा निर्वाचन क्षेत्र के किसी भी मतदाता द्वारा स्पीकर के समक्ष याचिका दायर करके प्रक्रिया शुरू की जा सकती है और जिस पर कुल मतदाताओं में से कम से कम एक चौथाई द्वारा हस्ताक्षर किए जाते हैं |

 राजा को प्रजा के अधीन होना चाहिए वरना वो जनता  को लूट लेगा और अपने देश को कर्ज़ मे डूबा  कर अपने देश को बर्बाद कर देगा  |