FDI: How are Modi Government & media houses destroying the digital media space?FDI: मोदी सरकार और मीडिया घराने किस तरह से Digital Media स्पेस को खत्म कर रहे हैं

FDI: How are Modi Government & media houses destroying the digital media space?

FDI: How are Modi Government & media houses destroying the digital media space?FDI: मोदी सरकार और   मीडिया घराने किस तरह से Digital Media स्पेस को खत्म कर रहे हैं
FDI: How are Modi Government & media houses destroying the digital media space?FDI: मोदी सरकार और   मीडिया घराने किस तरह से Digital Media स्पेस को खत्म कर रहे हैं

कुछ दिनों पहले ही  Modi सरकार ने Digital  Media में 26 फीसद प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (Fdi) को मंजूरी दी है. इस घोषणा ने मीडिया के एक हिस्से में एक किस्म की उलझन और नाराजगी पैदा की है तो दूसरी तरफ एक हिस्सा इसे बेहद जरूरी कदम बता कर सरकार के फैसले पर खुशी दर्ज करवा रहा है. खुशी दर्ज करवाने वालों की एक संस्था है  Digital News Publishers Association

5 अगस्त को Times Of India की Website  पर एक ख़बर Publich  हुई जिसका शीर्षक था Digital media bodies welcome 26% FDI cap . इस रिपोर्ट में DNPA के हवाले से सरकार के ताजा फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे देश में चल रहे तमाम डिजिटल मीडिया संस्थानों को फायदा होगा और सबको बराबरी के अवसर मिलेंगे.

 

 

Times Of India में बिना किसी बाइलाइन के छपी इस रिपोर्ट में एसोसिएशन ने यह कहते हुए सरकार के फैसले का स्वागत किया है कि भारत में डेली हंट, इनशॉर्ट्स, हेलो, यूसी न्यूज़ और न्यूज़डॉग जैसे संस्थानों की पहुंच भारतीय पब्लिशर्स से बहुत ज्यादा है क्योंकि इन संस्थानों को काफी संख्या में विदेशी फंड मिलता है, खासकर चीन से. इसकी बड़ी वजह हमारे यहां डिजिटल मीडिया में नियमों का स्पष्ट नहीं होना है. दूसरी बात इन न्यूज़ एग्रीगेटर की वजह से कई बार गलत सूचनाएं और असत्यापित ख़बरें फैलने की आशंका होती है.

डीएनपीए है क्या (DNPA)

भारत में डिजिटल मीडिया के बेहतर भविष्य की पैरोकारी करते हुए DNPA ने सरकार के फैसले को समर्थन दिया है. डीएनपीए महज एक साल पहले गठित हुई संस्था है. अभी इसे ठीक से एक साल भी पूरे नहीं हुए है. इस एसोसिएशन के कुल 10 सदस्य हैं जिनमें Amar Ujala, Indian Express, Ndtv, Dainik Jagron, Indian Today,Hinduistan Times, Malyalam Manaorama, Dainik Bhaskar, Indian Today और Times Of India शामिल हैं.

नामों की इस सूची से एक बात तो साफ हो जाती है कि इसके सभी सदस्य वो पारंपरिक मीडिया घराने हैं जिनकी मीडिया में मुख्य हिस्सेदारी या तो प्रिंट के क्षेत्र में है या फिर ब्रॉडकास्ट के क्षेत्र में. इन 10 मीडिया संस्थानों में से एक भी संस्थान का मुख्य कार्यक्षेत्र डिजिटल मीडिया नहीं है. जबकि हम मौजूदा डिजिटल मीडिया स्पेस को देखें तो पाते हैं कि यहां पर ऐसे तमाम नए डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म मौजूद हैं जो सिर्फ डिजिटल न्यूज़ के क्षेत्र में ही काम करते हैं. लेकिन उनका प्रतिनिधित्व DNPA से नदारद है. इस सवाल पर DNPA के चेयरमैन पवन अग्रवाल कहते हैं, “एसोसिएशन के मेंबरशिप चार्टर में सिर्फ डिजिटल प्लेटफॉर्म को सदस्य बनाने का प्रावधान भी है.”

न्यूज़लॉन्ड्री ने उनसे पूछा कि प्रावधान होना एक बात है, लेकिन क्या इस समय एसोसिएशन में एक भी सदस्य ऐसा है जो सिर्फ डिजिटल मीडिया से संबद्ध हो? इसके जवाब में अग्रवाल कहते हैं, “सदस्यों का विस्तार अभी जारी है.” जाहिर है अपने मौजूदा स्वरूप में यह सिर्फ और सिर्फ उन मीडिया संस्थानों की संस्था नज़र आती है जिनका मुख्य कार्यक्षेत्र डिजिटल न होकर टीवी या प्रिंट मीडिया है, डिजिटल मीडिया इन संस्थानों का एक हिस्सा भर हैं.

डिजिटल प्लेयर क्यों है नाराज?

एक तरफ पारंपरिक मीडिया घराने हैं और उनकी संस्था DNPA है जो सरकार के इस फैसले का स्वागत कर रही है, दूसरी तरफ कई डिजिटल मीडिया संस्थान सरकार के इस फैसले को ‘स्वतंत्र डिजिटल मीडिया’ संस्थानों पर अंकुश लगाने और खत्म करने की साजिश बता रहे हैं. इनका मानना है कि सरकार के इस फैसले के बाद स्वतंत्र डिजिटल मीडिया भारत में खुद को नहीं बचा पाएगा. क्योंकि पारम्परिक मीडिया संस्थान तो सरकार से विज्ञापन लेते हैं. इसके अलावा उनके पास और भी कई व्यवसाय है, लेकिन सिर्फ डिजिटल मीडिया चलाने वाले जो सरकार से विज्ञापन नहीं लेते, सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ लगातार लिखते रहे हैं, उनके साथ परेशानी आएगी.