How will I get essential items like medicine and grocery after PM Modi announces 21-day national lock down?

पीएम मोदी द्वारा 21 दिन के राष्ट्रीय लॉक डाउन की घोषणा के बाद मुझे दवा और किराने जैसी आवश्यक वस्तुएं कैसे मिलेंगी?

How will I get essential items like medicine and grocery after PM Modi announces 21-day national lock down?

(1) यदि आपके पास पैसा है तो प्रशासन ने आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति के लिए प्रत्येक क्षेत्र में कुछ दुकानों को चिन्हित किया है। आप अमुक दुकानों से नियत अवधी में आवश्यक सामग्री ले सकेंगे।

(2) पर भारत में एक बड़ी आबादी ऐसी है जो “रोज कमाने रोज खाने” की चुनौती का सामना करते हुए जीवन जीती है। अत: रिक्शा चालक, श्रमिक आदि दैनिक रूप से कार्य करके जीवन यापन करने वाले और कम वेतन वाले वर्ग को 21 दिवसीय लॉकडाउन में गंभीर वित्तीय संकट का सामना करना पड़ेगा। और इनके सामने वास्तव में यह समस्या है कि – वे दवा और किराने जैसी आवश्यक वस्तुएं कैसे जुटाएंगे !!

                            

और सम्भावना है कि, लॉक डाउन बढ़कर 60 दिनों या उससे भी ज्यादा समय तक खिंच सकता है। ऐसे करोड़ो परिवार है (हाँ, करोड़ो) जिनकी अर्थव्यस्था 1000-2000 की नकदी के इर्द गिर्द घूमती है। मतलब उनके पास 1000-2000 रूपये से ज्यादा नकदी कभी एक मुश्त नहीं होती !! यदि इस वर्ग पर जीवन यापन का बोझ बढ़ जाता है तो कानून व्यवस्था को बनाए रखना बहुत मुश्किल हो जाएगा।

(2.1) प्रस्तावित समाधान :

RBI के पास 28 लाख करोड़ से अधिक का कोष है। इस कोष का उपयोग निम्न तरीके से किया जा सकता है :

  1. प्रधानमंत्री प्रत्येक नागरिक के खाते में 1000 रू मासिक के हिसाब से जमा करने का आदेश जारी करें।
  2. और यह राशि प्रत्येक 30 दिन में अगले 3 माह तक जमा करें।
  3. इस तरह प्रत्येक नागरिक को अगले 90 दिनों में 3,000 रू प्राप्त होंगे।
  4. प्रधानमंत्री आधार कार्ड का इस्तेमाल करते हुए यह राशि खाते में भेज सकते है, या पैसा पहुँचाने के लिए अन्य किसी पारदर्शी तरीके का इस्तेमाल कर सकते है।

(2.2) कैसे अर्थव्यस्था के दृष्टीकोण से ऐसा किया जाना व्यवहारिक, न्यायपूर्ण एवं निरापद है।

  1. तीन माह तक प्रत्येक व्यक्ति को 1000 रूपये मासिक देने में कुल 4 लाख करोड़ रुपये खर्च होंगे, जो कि हमारी अर्थव्यवस्था के लिए आसानी से वहन करने योग्य है।
  2. RBI को इसके लिए किसी विदेशी मुद्रा या डॉलर की जरूरत नहीं है। यह राशि RBI के पास तरल रूप में पड़ी है, और तुरंत ट्रांसफर की जा सकती है।
  3. यह पैसा पहले से सप्लाई में है, अत: इसके लिए RBI को नोट छापने की जरूरत भी नहीं है, और इससे इन्फ्लेशन भी नहीं बढेगा।
  4. यह पैसा नागरिको के टैक्स से ही इकट्ठा किया गया है, और आपातकाल में इस्तेमाल किये जाने के लिए है।

कोष में आयी इस कमी की पूर्ती बाद में की जा सकती है, किन्तु अभी यह वितरण जरुरी है। यदि 1000 रुपये नहीं तो कम से कम 500 रुपये तो दिए ही जाने चाहिए। और यह फैसला तुरंत लेने की जरूरत है।

(2.3) पैसा सभी को क्यों दिया जाए सिर्फ गरीबो को क्यों नहीं ?

  • पहली वजह यह है कि — आज 70% से अधिक लोगो को इस धन की आवश्यकता है। जिन्हें इस पैसे की जरूरत नहीं है, या जो समृद्ध है उन्हें कुछ हफ्तों के बाद यह पैसा RBI को फिर से लौटा देना चाहिए। और सरकार उन लोगों के नाम प्रकाशित कर सकती है जिन्होंने यह पैसा नहीं लौटाया है, या लौटाने से इनकार कर दिया है। रिफंड नहीं करने वाले लोगो के नामों का प्रकाशन यह सुनिश्चित करेगा कि ऐसे 99% नागरिक पैसा लौटा देंगे जिन्हें इसकी आवश्यकता नहीं रह गयी है।

    और जो कमी रह जाती है उसकी पूर्ती करने के लिए सरकार बाद में कोई भी आयोजन (टेक्स दर में सामयिक अतिरिक्त वृद्धि या सरकारी खर्चो आदि में कटौती) कर सकती है। एक बार हम इस संकट से निकल जाते है तो यह पैसा फिर से खड़ा करना कोई समस्या नहीं है।
  • दूसरी वजह यह है कि — इस समय हमारे पास गरीब-अमीर को चिन्हित करने की कोई सटीक व्यवस्था नहीं है। BPL के सूचीकरण में भी काफी दोष है। सटीक और पारदर्शी व्यवस्था नहीं होने के कारण सरकार इसे चयनात्मक रूप से लागू करेगी जिससे झमेला बढ़ जाएगा। यदि प्रत्येक व्यक्ति को 1000 रुपया भेजा जाता है तो यह एकदम पारदर्शी एवं सत्यापित रहेगा कि प्रत्येक व्यक्ति को पैसा मिल गया है। और यह आसानी से गणन योग्य है।

यह खुली हुई बात है कि यदि कोरोना भारत में फ़ैलता है तो हमारे पास इससे डील करने के लिए कुछ नहीं है। कोरोना वायरस फेफड़ो पर हमला करता है अत: इससे इन्फेक्टेड व्यक्ति को सबसे पहले वेंटिलेटर की जरूरत होती है।

हमारे पास वेंटिलेटर नहीं है, और हमें बनाने भी नहीं आते है। यदि आयात करने जायेंगे तो इसमें भी शोर्टेज है, और हमें डॉलर की जरूरत होगी !!

              

यदि हम वेंटिलेटर आयात कर लेते है तो हमारे पास ICU यूनिट्स नहीं है। और हमारे पास रातों रात ICU यूनिट्स खड़ी करने की क्षमता भी नहीं है। और अगर हमने ICU यूनिट्स खड़े कर दिए तो हमारे पास डॉक्टर्स का उतना स्टाफ नहीं है।

और वैक्सीन एवं क्योर तो कोरोना का अभी तक दुनिया में किसी के पास नहीं है। और वैक्सीन बन भी जाती है तो अगले 6 महीने तक यह आने वाली नहीं है !!

अकेली मुंबई में 20% लोग लगभग फुटपाथ पर सोते है, 30% चालो में रहते है। ये लोग साझा / सार्वजानिक शौचालयों और साझा सार्वजनिक नलो का इस्तेमाल करते है। 100 आदमी इन्फेक्टेड हो गए तो आंकड़ा सप्ताह भर में ही हजारो में चला जायेगा। एक बहुत बड़ी आबादी गाँवों में निवास कर रही है, जहाँ कई किलोमीटर तक वेंटिलेटर, ICU, डॉक्टर का नामो निशान नहीं है।

मतलब यदि भारत में कोरोना पसर गया तो सरकार पूरे प्रयास करके भी कोई मदद नहीं कर पाएगी। और तब जो लोग इन्फेक्टेड होंगे उन्हें दोहरी मुसीबत का सामना करना पड़ेगा – वित्तीय एवं चिकित्सीय !!

कोरोना को फैलने से रोकने के लिए लॉक डाउन जरुरी है, और लॉक डाउन ने भारत के करोड़ो नागरिको पर फैलने से पहले ही वित्तीय संकट तो डाल दिया है। अत: सरकार को लॉक डाउन का दबाव कम करने के लिए नागरिको को वित्तीय मदद देनी तत्काल रूप से शुरू करनी चाहिए। और यह सीधे नकदी के रूप में होनी चाहिए।

(2.4) इसके लिए आप क्या कदम उठा सकते है :

प्रधानमंत्री जी को ट्वीट करें कि भारत के प्रत्येक नागरिक के खाते में 1000 रू मासिक के हिसाब से जमा करें। और यह राशि प्रत्येक 30 दिन में अगले 3 माह तक जमा करें। प्रधानमंत्री आधार का इस्तेमाल करते हुए यह राशि खाते में भेज सकते है, या पैसा पहुँचाने के लिए अन्य किसी पारदर्शी तरीके का इस्तेमाल कर सकते है।
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 कृपया यह ट्वीट करें —

@PmoIndia #DepositRsThousandPerAdharPerMonthForThreeMonths आधार का उपयोग कर 3 महीने तक बैंक खाते में प्रति व्यक्ति 1000 रु प्रति माह जमा करें। RBI के पास इसके लिए पर्याप्त कोष है। वर्ना लॉ एंड ऑर्डर बनाये रखने की गंभीर समस्या खड़ी हो सकती है !!

@PmoIndia #DepositRsThousandPerAdharPerMonthForThreeMonths using adhar, pls deposit Rs 1000 per PERSON per MONTH in bank account for 3 months, starting asap. RBI has reserves, and it will meet this expense. Or create new money. Or else, LAW ORDER situation may become SERIOUS !!

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