Is the 2000 note Rupees not promoting the hoarding of black money in India?क्या 2000 का नोट कालेधन की जमाख़ोरी को बढ़ावा नहीं दे रहा?

Is the 2000 note Rupees not promoting the hoarding of black money in India?

Is the 2000 note Rupees  not promoting the hoarding of black money in India?क्या 2000 का नोट कालेधन की जमाख़ोरी को बढ़ावा नहीं दे रहा?

नहीं। नोटों का काले धन से कोई ज्यादा लेना देना नहीं होता है। भारत में जितना काला धन है उसका 99% जमीनों में निवेशित है। अब ये जो 1% बचा है उसमे सोना, हीरे, नकदी आदि सब आ जाते है। तो काले धन का असली अड्डा जमीने है, और काले धन की जमाखोरी भी जमीनों में ही जाती है।


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कैसे ?
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भारत में जमीनों के बाजार मूल्य एवं सर्किल रेट में काफी अंतर होता है। जब आप जमीन खरीदने जाते हो तो सर्किल रेट से व्हाइट मनी देते हो और इस पर ड्यूटी चुकाते हो और बाकी पैसा नकदी में देते हो और इसका लेखा कहीं नहीं आता। यही वह काला धन है, और इसका इस्तेमाल जमीनों के ज्यादातर लेन देन में होता है।

उदाहरण के लिए :

(1) यदि A को B से 1 करोड़ की जमीन खरीदनी है तो इसका सर्किल रेट 60 लाख के आस पास आएगा। अब 60 लाख का पेमेंट चेक से होगा और 40 लाख का भुगतान नकद होगा। ये 40 लाख वो नकदी है जो जमीन खरीदने से पहले A के पास थी लेकिन अब जमीन खरीदने में खर्च हो गयी है।
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(2) अब B के पास ये 40 लाख का काला धन है, और ये नकदी के रूप में है। अब B इसमें से 10 लाख कहीं पर खर्च करेगा और 30 लाख को अपने पास रख लेगा।

कुछ समय बाद निम्न में से दो परिस्थितियां होगी

  • या तो B 30 लाख की जमीन खरीदेगा और इस दौरान 10 लाख का भुगतान नकदी के रूप में C को कर देगा। अब C के पास 10 लाख की नकदी आ गयी है।
  • या फिर B इसमें 20 लाख और डाल देगा और 2 करोड़ की कोई जमीन खरीद लेगा। और 2 करोड़ की जमीन के सौदे में B लगभग 60 लाख ( 40 लाख जो उसे A से मिला था , और 20 लाख जो उसके पास पड़ा था ) का काला धन D को दे देगा।

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इस तरह भारत में जितने भी जमीन के लेन देन होते है उनमे काले धन का इस्तेमाल होता है। नेताओं, मंत्रियो , जजों, अधिकारीयों आदि के पास सारी कमाई काली ही होती है, और वे हर साल करोड़ो रूपये बनाते है। तो वे जमीन के विक्रेता नहीं होते, सिर्फ क्रेता होते है। हर साल वे नकदी इकट्ठी करते है, और इससे जमीन खरीद लेते है। वे पैसा बनाते जाते है और जमीन खरीदते जाते है। उलटे सीधे धंधो से पैसा बनाने वाले भी अपनी कमाई जमीनों में डाल देते है।

उदाहरण के लिए मैं ऐसे कई नेताओं को जानता हूँ जिन्होंने पिछले 5 से 10 वर्षो में हजारो करोड़ की जमीन खरीदी है। वे सिर्फ खरीदते है, बेचते नहीं है। और बेचते इसीलिए नहीं है, क्योंकि उनकी कमाने की स्पीड काफी ज्यादा है। पूरे देश के सभी सरकारी अधिकारियों, जजों, मंत्रियो, माफियाओं, धनिकों आदि के पास खरबों की जमीने है। वे ट्रस्ट खोलते है और ट्रस्ट के नाम पर जमीन लेकर पटक देते है।
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ट्रस्ट के नाम पर जमीन होने से न तो यह रिकॉर्ड में आती है, और न ही इन्हें इस पर टेक्स चुकाना होता है। जब ये यहाँ जमीन खरीदकर थक जाते है तो विदेशो में पैसा भेज देते है और वहां पर भी जमीन स्टोर करना शुरू करते है। हमारे ज्यादातर मंत्रियो / जजों / सांसदों / विधायको का एक न एक पुत्र आपको विदेशी नागरिक मिलेगा। और ख़ास कर अमेरिकी नागरिक। अब यदि आप इन लोगो की तलाशी लोगे तो इनके पास 2-5 लाख से ज्यादा की नकदी नहीं मिलेगी, लेकिन जमीन इनके पास अरबों की है।  

तो नकदी जमीनों के सौदे करने में टोपी की तरह इधर से उधर घूमती रहती है। इसकी जमाखोरी कोई नहीं करता। जो लोग जमा करते है वे अल्टीमेटली इसकी जमीन खरीदने के लिए जमा कर रहे होते है, और अंत में जमीन खरीद लेते है। इस तरह 1 करोड़ की जमीन एक साल में घूम घूम कर 100 करोड़ का काला धन जमीनों में पहुंचा देती है।

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बड़े नोट नकदी के परिवहन को आसान बनाते है, किन्तु अब क्रिप्टो करेंसी आने के बाद बड़े नोट लेकर कोई घूमता नहीं है। वह नकदी से क्रिप्टो लेता है और क्रिप्टो में पेमेंट करके जमीन खरीद लेता है !! तो बड़े नोटों का काले धन की जमाखोरी से कोई ज्यादा लेना देना नहीं है, लेकिन पेड मीडिया काले धन को नकदी से जोड़ने के लिए काफी मेहनत करता है, इसीलिए इस तरह की बातें फैलती है।
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यदि आपको काले धन को रोकना है तो जमीनों के लेन देन को ठीक करने के क़ानून बनाने होंगे। और काले धन की बात करते समय पेड मीडियाकर्मी जमीनों के बिंदु को टच ही नहीं करते है !!
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नोटबंदी का तमाशा शुरू होने के 15 दिन बाद मैंने कार्यकर्ताओ के सहयोग से इस आशय का एक विज्ञापन पेड दैनिक भास्कर प्रकाशित किया था, जिसमे काले धन को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कानूनों के बारे में विवरण थे। इसका टेक्स्ट आप यहाँ देख सकते है -

समाधान : इस समस्या के इलाज के लिए मैं 2 खंड गेजेट में छापने को कहता हूँ।

  • भू-स्वामित्व के आंकड़े सार्वजनिक करना : इस खंड में 4 धाराएं है और यह ये 4 धाराएं भारत की सीमा में स्थित प्रत्येक इंच भूमि के स्वामित्व की जानकारी को सार्वजनिक करता है।सभी सरकारी कर्मचारी भी इसमें शामिल है।
  • जमीनों के बाजार मूल्य एवं सर्किल रेट का अंतर कम करना : इस खंड में 6 धाराएं है, और इस खंड के गेजेट में आने के सिर्फ 4 महीनो में सर्किल रेट और बाजार मूल्य का अंतर कम हो जाएगा।

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निचे वह इबारत दी गयी है जिन्हें गेजेट में छापने से जमीनों में काले धन का निवेश होना बंद हो जाएगा

(01) भू-स्वामित्व के आंकड़े सार्वजनिक करना :
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स्त्रोत : रिक्त भूमि कर

(1.1) इस सम्बन्ध में आवश्यक निर्देशों का विज्ञापन प्रकाशित होने के 90 दिनों के भीतर सभी व्यक्ति, साझेदार, अन्य कम्पनियां, सार्वजनिक उपक्रम, सरकारी इकाइयां, ट्रस्ट, सहकारी संस्थाएं, विदेशी व्यक्ति, इकाइयां तथा अन्य सभी नागरिक जो कि भारत में किसी भूमि या निर्माण में आंशिक या पूर्ण स्वामित्व रखते है, अपने स्वामित्व की सूचना का पंजीयन करायेंगे। यह पंजीयन जिला रिक्त भूमि कर अधिकारी ( DELTO = District Empty Land Officer ) कार्यालय में दर्ज किया जा सकेगा। सभी नागरिक भूमि, फ्लेट, भवन आदि के स्वामित्व से सम्बंधित किये गए दावों की सूचना भी पंजीकृत करायेंगे, चाहे ऐसे दावों से सम्बंधित वाद अदालत में दायर नही किये गए हो अथवा नही।

(1.2) NELTO सभी भूमि स्वामित्व तथा दावों के अभिलेखों का विवरण स्वामी के नाम, माता पिता के नाम, छाया चित्र, पेन कार्ड संख्या, आधार कार्ड संख्या, मतदाता पहचान संख्या, उनकी मतदाता पहचान संख्या, पेन कार्ड संख्या, आधार संख्या के साथ इंटरनेट पर पारदर्शी रूप से सार्वजनिक करेगा। स्वामी के महिला होने की स्थिति में महिला का छाया चित्र प्रकाशित नही किया जाएगा, 

(1.2) NELTO सभी भूमि स्वामित्व तथा दावों के अभिलेखों का विवरण स्वामी के नाम, माता पिता के नाम, छाया चित्र, पेन कार्ड संख्या, आधार कार्ड संख्या, मतदाता पहचान संख्या, उनकी मतदाता पहचान संख्या, पेन कार्ड संख्या, आधार संख्या के साथ इंटरनेट पर पारदर्शी रूप से सार्वजनिक करेगा। स्वामी के महिला होने की स्थिति में महिला का छाया चित्र प्रकाशित नही किया जाएगा, किन्तु महिला का द्वारा अनुमोदित उसके परिवार के किसी पुरुष सदस्य, या उसके द्वारा अनुमोदित अन्य पुरुष या उसके वकील का छाया चित्र वेबसाईट पर रखा जायेगा। सरकारी संस्थाओं द्वारा उपयोग में लिए जा रहे सभी प्रकार के भूमि, फ्लेट, चाहरदीवारी जैसे जिलाधीश कार्यालय, नगर परिषद आदि के समस्त अभिलेख और विवरण भी सार्वजनिक किये जायेंगे।

(1.3) सभी सरकारी कर्मचारी धारण की गयी अपनी समस्त संपत्ति की घोषणा करेंगे जिसमें जमीन, इमारतें, फ्लेट, सोना, कीमती धातुएं, शेयर, डिबेंचर, ट्रस्ट जिनमें में जुड़े हए है आदि शामिल है। न्यायाधीशो, प्रशासनिक अधिकारियों आदि को शामिल करते हुए सभी सरकारी कर्मचारियों के वेतन एवं उनके भू-स्वामित्व के सभी ब्यौरे इस तरह सार्वजनिक रूप से रखे जायेंगे कि कोई भी नागरिक इन्हें पारदर्शी ढंग से देख सके। सरकारी कर्मचारियों के इन ब्यौरो को उनके विभागों एवं मंत्रालयों के आधार पर वर्गीकृत करके इंटरनेट पर रखा जाएगा। प्रत्येक सरकारी कर्मचारी की प्रोफाइल के साथ उसके समस्त नजदीकी रक्त संबंधियों-रिश्तेदारों आदि की सूचना भी जुडी    

(02) जमीनों के बाजार मूल्य एवं सर्किल रेट का अंतर कम करना :
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स्त्रोत : रिक्त भूमि कर

(2.1) जब भी विक्रेता कोई प्रॉपर्टी बेचेगा तो इसका पंजीयन TELTO कार्यालय में कराया जाएगा। यह विवरण क्रेता एवं विक्रेता को TELTO कार्यालय में अलग अलग प्रस्तुत करना होगा। दोनों पक्ष किसी प्रोपर्टी की खरीद फरोख्त होने के 7 दिवस के भीतर अमुक भूखंड का नंबर, स्थिति, आकार, निर्माण का आकार, दोनों पक्षों के नाम, पहचान पत्र संख्या तथा भुगतान की गयी राशि का विवरण TELTO कार्यालय में या उसकी वेबसाईट पर दर्ज करायेंगे। यदि ऐसे विवरण विलम्ब से प्रस्तुत किये जाते है तो अमुक भूखंड के मूल्य का 0.01% प्रतिदिन की दर से जुर्माना देय होगा।

(2.2) जब भी TELTO को ऐसे किसी भूखंड के विक्रय की जानकारी मिलेगी वह अमुक भूखंड से सम्बंधित सम्पूर्ण विवरण सार्वजनिक करने के लिए वेबसाईट पर दर्ज करेगा। यदि क्रेता कोई ट्रस्ट या कम्पनी है तो TELTO सभी ट्रस्टियों के नाम तथा पहचान पत्र संख्या वेबसाईट पर रखेगा। ऐसी स्थिति में जबकि क्रेता कोई पब्लिक लिमिटेड कम्पनी है कंपनी का नाम, निदेशक मंडल तथा मुख्य अंश धारको के विवरण दर्ज किये जायेंगे, न कि सभी शेयर धारको के। TELTO प्रोपर्टी खरीदने वाले क्रेता को अमुक प्रोपर्टी का संभावित स्वामी के रूप में दर्ज करेगा।

(2.3) सार्वजनिक रूप से दर्ज होने के बाद यह प्रोपर्टी 30 दिवस तक सार्वजनिक नीलामी के लिए    उपलब्ध रहेगी। यदि कोई तृतीय पक्ष 30 दिनों के भीतर इस प्रोपर्टी के विक्रय मूल्य से 25% अधिक भुगतान करता है, तो TELTO पूर्व क्रेता को 120% राशि का भुगतान करेगा तथा तृतीय पक्ष को अमुक भूखंड के अगले संभावित स्वामी के रूप में दर्ज करेगा। संभावित स्वामी द्वारा लगाईं गयी इस राशि को स्वीकार करने के बाद TELTO फिर से अगले 30 दिनों तक अगली बोली की प्रतीक्षा करेगा। यदि अन्य कोई पक्षकार इस भूखंड के लिए बोली लगाता है, तो यह बोली उस राशि से 25% अधिक होनी चाहिए जिस राशि का भुगतान संभावित स्वामी द्वारा पिछली खरीद में किया गया था। यदि अगले 30 दिनों के भीतर अन्य कोई पक्ष अमुक भूखंड के लिए कोई बोली नही लगाता है, तो अंतिम क्रेता को भूखंड का स्वामी घोषित कर दिया जाएगा      

टिप्पणी से प्रश्न - आपने 2000 हजार के नोट के असली मुद्दे को किनारे कर दिया है

(A) यह एक तथ्य है कि, काले धन का 99% जमीनों में निवेशित है, और जमाखोरी भी जमीनों में ही की जाती है।

1977 से पहले तक बड़े नोट नहीं होते थे, तो भी इसी गति से जमीनों में काले धन की जमाखोरी की जा रही थी। मोरार देसाई ने 5000 और 10,000 के नोट चला दिए, और बाद में इन्हे वापिस ले लिया गया। फिर 90 के दशक में 1000-500 के नोट जारी हुए और मोदी साहेब ने 1000 का बंद करके 2000 का चला दिया। लेकिन इस दौरान जमीनों में काले धन जमा होता रहा, होता रहा और होता जा रहा है। आप इकोनॉमी में सिर्फ 50 रूपये के नोट रखेंगे तो भी काले धन में कोई कमी नहीं आएगी। भू माफिया और भ्रष्टाचार करने वाले लोग नए तरीके निकाल लायेंगे। तो मेरे विचार में बड़े नोट छोटे नोट को ज्यादा भार देने से कोई उल्लेखनीय बदलाव नहीं आएगा। 

(B) बड़े नोटों पर मेरा स्टेण्ड : अभी अमेरिकी बैंकिंग कंपनियों द्वारा भारत के बैंको तेजी से टेक ओवर किया जा रहा है। जल्दी ही मोदी साहेब या उनकी विरासत लेने वाला पीएम SBI को बेच देगा। और तब भारत की पूरी इकोनॉमी एवं लेन देन अमेरिकी बैंको पर निर्भर हो जायेगी। वे आपको मोबाईल फोन या डायरी में नंबर लिखकर दे देंगे, और बाद में टोपी देकर निकल जाएंगे। और इस तरह आपके पास नोटों की जगह सिर्फ नंबर रह जाएंगे। दर्जनों देशो को ये बैंक इस तरह की टोपियां दे चुके है, और पिछले 100 साल से यही इनका कारोबार है।.

जब तक भारत में विदेशी बैंको का नियंत्रण नहीं था तब तक मैं कैश इकोनॉमी में बैंकिंग व्यवहार को बढ़ावा देने में मानता था। लेकिन जब हमारे बैंक ही विदेशियों के कंट्रोल में जा रहे है तो मैं अब कैश इकोनॉमी में भी मानता हूँ, और बैंकिंग व्यवहार में भी। तो मेरा स्टेण्ड है कि, नकदी के लेन देन पर कोई जाया प्रतिबन्ध नहीं होने चाहिए। सिर्फ आय से अधिक नकदी होने पर व्यक्ति की जवाबदेहिता हो, अन्यथा नहीं।

इस तरह, हमें एक समानांतर अर्थव्यवस्था भी चाहिए जो कैश इकोनॉमी पर चलती है। नकदी का   

मतलब काला धन नहीं होता है। काला धन उसे कहते है जिसे गैर कानूनी तरीको से बनाया गया हो। यदि कोई व्यक्ति कारोबार में मेहनत करके पैसा बना रहा है, और इसे नकदी में ही रखता है तो इसे काला धन नहीं कह सकते !!

(C) कैसे मौजूदा व्यवस्था में बड़े नोट बंद होने से कई ईमानदार नागरिको को समस्या का सामना करना पड़ सकता है ?

.मान लीजिये कि, मैं एक ईमानदार व्यक्ति हूँ और मेरे पास सारा पैसा व्हाइट है। मान लीजिए कि, मुझे 20 लाख की एक जमीन खरीदनी है, और इसकी DLC रेट 13 लाख है। इस स्थिति में मुझे 7 लाख का भुगतान नकद में करना पड़ेगा। यदि मुझे जमीन खरीदनी है तो मुझे 7 लाख कैश चाहिए ही चाहिए, और यह 7 लाख काला धन भी होना चाहिए !! इसके अलावा मेरे पास इसके अलावा कोई उपाय नहीं है।


तो पहले चरण में सरकार ने इस तरह के क़ानून छापे हुए है कि, वे एक ईमानदार आदमी को काला धन जुटाने के लिए बाध्य करते है। अब मुझे जमीन खरीदने के लिए ये 7 लाख का वजन उठाकर छुपते 

छुपाते जाना पड़ेगा। और मैं बिलकुल भी नहीं चाहता कि सभी बड़े नोट बंद कर दिए जाए और मैं 50 रूपये के बंडलों के 2 ब्रीफकेस लेकर जाऊं !! और यदि सौदा 50 करोड़ का है तो मुझे इन्हें बोरो में डालकर ले जाना पड़ेगा !!.

तो इस मामले में मेरा स्टेण्ड यह है कि :

  1. पहले जमीनों के सर्किल रेट और बाजार मूल्य में अंतर क ख़त्म करने का कानून गैजेट में छापे जाए।
  2. फिर भारत के सरकारी बैंको को सुधारने के लिए जूरी कोर्ट / RBI गवर्नर पर वोट वापसी का क़ानून गैजेट में निकाला जाए, ताकि सरकारी बैंक अच्छे से काम करना शुरू करें।
  3. और इसके साथ ही भारत में बैंकिंग क्षेत्र में विदेशी निवेश पर रोक लगाने के लिए गैजेट नोटिफिकेशन छापा जाए।
  4. इतना होने के बाद हम ऐसे कई क़ानून छाप सकते है जिससे नागरिक चैक से पेमेंट करने के लिए प्रोत्साहित हो, और नकदी के लेन देन में कमी आये। 

    और इसके बाद मैं बड़े नोटों को बंद करने का समर्थन कर सकूँगा।

    पेड मीडिया कर्मियों को ऊपर दिए गए चार बिन्दुओ पर कुछ बोलना नहीं होता है। अत: वे पिछले 70 सालों से काले धन के नाम पर नकदी पर बहस चला रहे है, और घूम फिर कर उनका मुख्य बिंदु नोट ही रहता है। और ज्यादातर नागरिक भी धन का मतलब मुद्रा से ही लेते है, और इसीलिए वे काले धन एवं जमाखोरी पर चर्चा करते समय मुख्य तौर पर नकदी पर ही ध्यान केन्द्रित करते है। मेरा मानना है कि, जिन कार्यकर्ताओ को काले धन को कम करने में रुचि है उन्हें जमीनों के क़ानून सुधारने एवं सरकारी संस्थाओ / अदालतों में व्याप्त भ्रष्टाचार को कम करने के लिए आवश्यक कानूनों पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिये।

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    (*) वैसे मेरा मानना है कि मोदी साहेब आय उनके कोई अगले वारिस 2000 के नोटों को बंद कर सकते है। वजह इसकी यह है कि, बड़े नोटों के आने और नकदी का ज्यादा लेन देन होने से बैंको की ताकत में कमी आती है। और अल्टीमेटली गेजेट में वही आने वाले है, जिससे बैंको की ताकत बढे। या फिर वे बड़े नोटों की सप्लाई तोड़ देंगे, या नकदी रखने को गैर कानूनी टाइप बना देंगे। कुल मिलाकर, मेरे मानने में बड़े नोट ज्यादा समय तक टिकने वाले नहीं है।