सर्वे : महिला साक्षरता दर में 15 फीसदी इजाफा

डिजिटल डेस्क, नागपुर। भारतीय महिलाओं की साक्षरता दर में 15 फीसदी का इजाफा हुआ है। 2017-18 में की गई एक रिसर्च के मुताबिक 2011 में देश की महिलाओं की साक्षरता दर 64.6 फीसदी थी, जो अब बढ़कर 79.63 फीसदी हो...

सर्वे : महिला साक्षरता दर में 15 फीसदी इजाफा

डिजिटल डेस्क, नागपुर। भारतीय महिलाओं की साक्षरता दर में 15 फीसदी का इजाफा हुआ है। 2017-18 में की गई एक रिसर्च के मुताबिक 2011 में देश की महिलाओं की साक्षरता दर 64.6 फीसदी थी, जो अब बढ़कर 79.63 फीसदी हो चुकी है। यह रिसर्च 29 राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों के 465 जिलों में की गई। सभी राज्यों से समान अनुपात में महिलाओं को शामिल किया गया। जिसमें 74 हजार 95 महिलाओं ने अपना योगदान दिया।

कामकाजी महिलाओं की स्थिति

44.24 फीसदी महिलाएं रोजगार है जिसमें कई महिलाएं अपना निजी व्यवसाय भी करती हैं। जबकि 55.24 फीसदी महिलाएं बेरोजगार हैं जिसमें सेवानिवृत्ति भी शामिल है। आधे से ज्यादा रोजगार महिलाएं 31 से 50 साल की है। सबसे ज्यादा आदिवासी महिलाएं रोजगार से जुड़ी हैं जिनका 52.64 फीसदी है। विमुक्त जाति और धूमंतू जनजाति 49.67 फीसदी, विशेष पिछड़ा वर्ग 49.34 फीसदी, अनुसूचित जाति 42.41 फीसदी और सामान्य वर्ग के सिर्फ 39.34 फीसदी महिलाएं के पास रोजगार है। ईसाई महिलाएं सबसे अधिक और सिख महिलाएं सबसे कम रोजगार है। ज्यादातर 50 फीसदी से अधिक महिलाओं को वेतन कैश दिया जाता है। 38.74 फीसदी को इलेक्ट्रोनिक मोड और कुछ को चेक से वेतन का भुगतान किया जाता है। ज्यादातर महिलाओं को कार्य स्थल पर रेस्ट रूम, कैंटीन, क्रेच, यातायात, लोन की सुविधा नहीं है। 51 फीसदी कामकाजी महिलाओं को मातृत्व अवकाश का किसी भी प्रकार का लाभ नहीं मिलता है।

शादी और आर्थिक तंगी बन रही बाधा

सर्वे में पाया गया कि महिलाओं में साक्षरता का प्रमाण बढ़ रहा है लेकिन 10वीं और 12वीं के बाद पढ़ाई छोड़ने के प्रमाण में कमी नहीं है। इसका प्रमुख कारण शादी और परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक ना होना है। राजस्थान के घूमंतू जनजाति की 92.62 फीसदी महिलाएं असाक्षर है। सर्वे में यह भी सामने आया कि आरक्षण अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़ा वर्ग की लड़कियों को उच्च शिक्षा हासिल करने में मददगार साबित हो रहा है।


आध्यात्मिक महिलाएं ज्यादा खुश

सर्वे में यह भी सामने आया कि आध्यात्मिक क्षेत्र से जुड़ी महिलाओं दूसरे क्षेत्र की महिलाओं से ज्यादा खुश है। वहीं लिव इन में रहने वाली महिलाओं की तुलना में शादी कर घर बसाने वाली महिलाएं ज्यादा खुश है। आध्यात्मिकता में विश्वास रखने वाली महिलाएं अधिक खुशी मिली। 90 प्रतिशत ऐसी महिलाओं, उनके पास परिवार और इनकम नहीं है वह 10 हजार रुपए महीने की कमाई वाली महिलाओं से अधिक खुश मिली जो बताता है कि खुशियां पैसों से नहीं आती है। इस सर्वे के लिए विभिन्न प्रोटोकॉल का विशेष ध्यान रखा गया था।

भारत में महिलाओं की स्थिति का लोकार्पण 10 को

दूष्टि स्त्री अध्ययन प्रबोधन केन्द्र द्वारा प्रकाशित भारत में महिलाओं की स्थिति (स्टेट्स ऑफ वूमन इन इंडिया) का लोकापर्ण गुरुवार 10 अक्टूबर को शाम 5.30 बजे महाराजबाग चौक स्थिति राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय के दीक्षांत सभागृह में किया जाएगा। कार्यक्रम में  महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोशियारी व नीति आयोग की श्रीमती बिंदू डालमिया प्रमुख रूप से उपस्थित रहेंगी। यह जानकारी केन्द्र की प्रकल्प संचालक डॉ.मनीषा कोठेकर ने शनिवार को प्रेस क्लब में पत्रकारों से चर्चा के दौरान दी। उन्होंने बताया कि अब तक का यह सबसे बड़ा सर्वे है। उनके साथ डॉ.शिल्पा पुराणिक, डॉ.अंजली देशपांडे, लीना गहाने, हर्षदा कुरेकर, अर्चना सोहनी उपस्थित थीं।



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